महाराष्ट्र के पालघर जिले के कासा इलाके में गुरुवार रात चोरी के शक में 3 लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। रविवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह बताया गया कि पुलिस ने साधुओं की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, ग्रामीणों ने इन्हें देर रात गांव में संदिग्ध रूप से कार में घूमते हुए पकड़ा था। इसके बाद पत्थर और डंडों से इन पर हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही तीनों की मौत हो चुकी थी। कार में एक ड्राइवर और दो साधु सवार थे।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया है। 101 आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है जबकि 9 नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया है। इस घटना के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी वीडियो पोस्ट करके लिखा था कि महाराष्ट्र के पालघर में 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया मगर सारे लिबरल खामोश हैं।
घटना के दिन ही आरोपी गिरफ्तार- मुख्यमंत्री कार्यालय
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया कि पालघर की घटना पर कार्रवाई की गई है। जिन लोगों ने 2 साधुओं, एक ड्राइवर और पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, पुलिस ने घटना के दिन ही उन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस अपराध और शर्मनाक कृत्य के अपराधियों को कठोर दण्ड दिया जाएगा।
कार से मुंबई से आए थे तीनों संदिग्ध
कासा पुलिस स्टेशन के निरीक्षक आनंदराव काले ने बताया था कि घटना कर्फ्यू के दौरान गुरुवार को रात के 9.30 से 10 बजे के बीच यह घटना हुई है। तीनों की पहचान अभी तक नहीं की जा सकी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए पालघर के सरकारी अस्पताल में भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि तीनों एक कार से मुंबई से आए थे। यह कार गडचिंचाले के पास ढाबाड़ी-खानवेल मार्ग पर बरामद हुई है।
कार से खींच कर बाहर निकाल की गई हत्या
काले ने बताया- जांच में यह भी सामने आया ही कि मृतकों को कार से बाहर निकाला गया और उन पर पत्थर और लाठियाें से हमला कर दिया। मरने से पहले तीनों में से किसी एक ने पुलिस स्टेशन में फोन करके इसकी जानकारी दी थी। जब तक पुलिस वहां पहुंचती वह लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें भीड़ से छुड़ाया और कासा गवर्मेंट हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तीनों के शरीर पर गंभीर चोटे थी। पुलिस ने 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 302, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत मामला दर्ज किया गया है।